अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद के बी.lजे. मेडिकल कॉलेज के पास गुरुवार को जब एयर इंडिया की फ्लाइट A171 हादसे का शिकार हुई, तो पल भर में सैकड़ों ज़िंदगियों की कहानी अधूरी रह गई। किसी का बचपन छिन गया, किसी का बुढ़ापा अकेला हो गया… और किसी की जिंदगी से वो आधार ही चला गया, जिसके सहारे वो जी रहे थे।
इस भयावह हादसे में 241 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, लेकिन दुख की बात ये है कि जहाज के बाहर भी कई ज़िंदगियां इस हादसे का शिकार हो गईं। 30 से ज्यादा ऐसे लोग, जिनका उड़ान से कोई वास्ता नहीं था, पर उनकी किस्मत उस दिन उड़ते हुए लोहे के परिंदे से जा टकराई।
जिनकी जान सिर्फ एक ‘आधार कार्ड’ के लिए चली गई
रणवीर सिंह और उनकी पत्नी चावड़ा चेतनाबा भी उन्हीं लोगों में थे। रणवीर बी.जे. मेडिकल कॉलेज में एक सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते थे। उस दिन उन्होंने छुट्टी ली थी ताकि पत्नी का और अपना आधार कार्ड अपडेट करा सकें। यही अपडेट अब बच्चों के जीवन की सबसे बड़ी गड़बड़ी बन गया। प्लेन का एक भारी हिस्सा कॉलेज के आईजी कंपाउंड के पास आ गिरा—वहीं पर रणवीर और चेतना अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे। और अगले ही पल, ज़िंदगी की बारी खत्म हो गई।
दो मासूम सवालों के जवाब अब कभी नहीं मिलेंगे
रणवीर और चेतना के पीछे दो बच्चे हैं—16 साल की बेटी और 8 साल का बेटा। गुरुवार की शाम से दोनों दरवाज़े की ओर देख रहे हैं, उन्हें अब तक नहीं बताया गया कि मम्मी-पापा अब कभी लौटकर नहीं आएंगे. ‘दादी, पापा कब आएंगे? मम्मी को फोन क्यों नहीं लग रहा?’ मासूम सवाल अब पूरे परिवार की आत्मा को रोज़ छलनी करेंगे।
एक बेटा, जो कभी लौटेगा नहीं
रणवीर अपने बुज़ुर्ग माता-पिता के एकमात्र सहारा थे। उम्र की उस दहलीज़ पर, जब लोग बेटे के कंधे का सहारा लेते हैं, रणवीर के मां-बाप अब उसी बेटे की तस्वीर को गले लगाकर रो रहे हैं। रणवीर और चेतना की मौत सिर्फ एक खबर नहीं है। यह उस हकीकत की याद दिलाती है कि जिंदगी कितनी नाजुक है… और कभी-कभी, एक आधार कार्ड के लिए घर से निकला इंसान फिर कभी लौटकर नहीं आता।




