ऑनलाइन साइट्स पर जीवनसाथी की तलाश जरा संभलकर, सक्रिय है ‘गैंग्स ऑफ़ ठग’

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भोपाल: यदि आप भी लाइफ पार्टनर की ऑनलाइन साइट्स के जरिए तलाश कर रहे हैं तो ज़रा संभल जाइए। ऐसा इसलिए क्योंकि, मध्यप्रदेश में ‘गैंग्स ऑफ ठग’ सक्रिय हैं। ये गैंग्स ऐसे लोगों को अपना शिकार बनाते हैं, जिनकी शादी नहीं हुई हो और उम्र ज्यादा हो गई हो। कुंवारे युवक-युवतियों को ये अपने जाम में फंसाकर उनके साथ ठगी करते हैं। अभी तक ये लोग पांच हजार लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी इन लोगों ने अपना जाल फैला रखा है।

खोल रखा था कॉल सेंटर

‘गैंग्स ऑफ ठग’ के सदस्य लोगों को शिकार बनाने के लिए मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपना रजिस्ट्रेशन कराते हैं। इसके लिए इन्होने एक कॉल सेंटर खोल रखा था। काेई लड़की बनता है तो कोई लड़का। ये लोग ऐसे लोगों को ढूंढते जिनकी उम्र ज्यादा हो गई हो और शादी नहीं हुई हो। यदि कोई लड़का ऐसा हो तो गैंग की लड़की उसे कॉल करते और सुरीली आवाज में फंसाकर लड़कियों के फोटो भेजती। वहीं, यदि कोई ऐसी लड़की हो तो, उसे लड़का कॉल कर खुद को सरकारी जॉब वाला बताकर फंसाता। फिर उनसे पैसा लेते और ठगी करते।

राजस्थान के सबसे ज्यादा लोग हुए शिकार

पुलिस को गैंग से मिले रिकॉर्ड में पता चला है कि ये लोग अभी तक पांच हजार लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा राजस्थान के 430 लोगों को इन्होने अपना शिकार बनाया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के 421 लोगों का रिकॉर्ड मिला है। मध्यप्रदेश के 110 लोग शादी के नाम पर ठगी का शिकार हुए हैं। ठगे गए लोगों में 70 % लोग दुकानदार, प्राइवेट नौकरी वाले हैं। 34 तो ऐसे हैं, जिनकी उम्र 50 से 60 वर्ष के बीच है।

असिस्टेंट प्रोफेसर से रेप और ठगी

जीवाजी यूनिवर्सिटी में कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर से मेट्रिमोनियल साइट पर शादी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। उनसे सत्यप्रकाश तिवारी नाम के शख्स ने संपर्क किया और खुद को पुलिसकर्मी बताया। फिर शादी का प्रस्ताव देकर घर आया। इसके बाद दो साल उसने प्रोफेसर के साथ शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान उसने 51 हजार रुपये भी लिए। जब असिस्टेंट प्रोफेसर ने नौकरी, आईदी कार्ड के बारे में जानकारी मांगी तो उसने देने से मना कर दिया और नंबर ब्लाक कर दिया।

 

 

 

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