जयपुर: राजस्थान में युवाओं में बढ़ रही नशे की लत के बाद अब वहां के पशु-पक्षी भी नशे में झूमते नजर अ रहे है। प्रदेश के पशु-पक्षी भी नशा करने के आदी हो रहे हैं। ये पशु-पक्षी अफीम का नशा करते है, जिससे अफीम की खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है। ये अफीम के खेतों के चारों ओर मंडराते रहते है। इन्हें रोकने के लिए किसानों ने कई तरह के इंतजाम भी किए लेकिन नशे के आदी हो चुके पशु-पक्षी किसी भी तरह वहां पहुंच ही जाते हैं।
दरअसल, राजस्थान के भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ में अफीम की खेती होती है। फरवरी के दूसरे सप्ताह से लेकर मार्च तक अफीम के पौधे से निकले डोडे में चीरा लगाया जाता है। इन दिनों तोते आकर इन पर बैठ जाते हैं और पौधे की डंडी तोड़कर दूसरी जगह ले जाकर खाते हैं।तोतों के अलावा रात के समय में नीलगाय भी पौधों काे खाकर खेत के किनारे बैठ जाती हैं।
फसलों को इनसे बचाने के लिए किसानों को अब 24 घंटे खेतों की निगरानी करना पड़ रही है। तारबंदी के बाद अब खतों को नेट से चारों तरफ से पैक किया गया है। इसके बाद भी नील गायें अंदर आ जाती है। वहीं पक्षियों को रोकना भी असंभव हो जाता है, क्योंकि उन्हें नशे की लत लग चुकी है और उसे पूरा करने के लिए वो कैसी भी खेत में घुस जाते है।
किसानों ने बताया कि नशेड़ी जीव ही परेशानी नहीं है। विभाग की ओर से अफीम की खेती के लिए लाइसेंस दिया जाता है। निश्चित मात्रा में पैदावार कर अफीम सरकार को जमा करवाना होता है। अफीम कम पड़ने पर महंगे दामों पर खरीदकर उसे जमा करवाना पड़ता है। फसलों से अफीम का दूध चाट लेने से पैदावार कम होती है।



