गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के एक निजी हॉस्पिटल में महिला फिजियोथेरेपिस्ट को इलाज के नाम पर यातनाएं दी गई। पेट दर्द की शिकायत के चलते महिला फिजियोथेरेपिस्ट हॉस्पिटल में भर्ती हुई थी। इस दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई, तो डॉक्टर्स ने उसे होश में लाने के लिए इलेक्ट्रिक शॉक्स दिए। परिजनों ने अब उस हॉस्पिटल से पीड़िता को डिस्चार्ज कराकर दूसरे हॉस्पिटल में एडमिट कराया है।
दरअसल, जीटी रोड पर न्यू पंचवटी की रहने वाली कुमकुम गुप्ता फिजियोथेरेपिस्ट हैं। पहले वह नेहरु नगर के गणेश हॉस्पिटल में काम करती थी। 13 मार्च को पेट दर्द की शिकायत के चलते उन्हें गणेश हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद पेट में संक्रमण बताते हुए इलाज शुरू कर दिया।
परिजनों का कहना है कि डॉक्टर्स ने एक के एक कुमकुम को 6 इंजेक्शन लगाए, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टर्स ने उन्हें कुछ बताए बिना ही बेटी को प्राइवेट वार्ड से आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। परिजनों का कहना है कि वह जब आईसीयू में बेटी को देखने के लिए पहुंचे तो शरीर पर इलेक्ट्रिक शॉक जैसे निशान थे। आंख, गले और छाती पर भी निशान
कुमकुम ने उन्हें बताया कि आंखों पर रुई बांध दी गई थी, जिससे कुछ नहीं दिखे। कुमकुम की मां ममता ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों ने उनकी बेटी को होश में लाने के लिए शारीरिक यातनाएं दी। हालत ज्यादा बिगड़ते देख परिजनों ने कुमकुम को दूसरे हॉस्पिटल में एडमिट कराया है। इस मामले में कुमकुम की मां ममता गुप्ता ने गणेश हॉस्पिटल के मालिक डॉक्टर उमेश मदान, अखिलेश गुप्ता व अन्य स्टाफ के खिलाफ गाजियाबाद एसएसपी व थाना सिहानी गेट पर बुधवार सुबह एक एप्लीकेशन दी है।



