दलित युवक ने की आत्महत्या, पुलिस अधिकारियों को बताया जिम्मेदार

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अजमेर: राज्स्ताहान के अजमेर में बीती रात दलित समाज के युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सुसाइड करने से पहले उसने एक नोट लिखा- जिसमें उसने पुलिस पर न्याय नहीं करने का आरोप लगाया है। साथ ही दो पुलिस अधिकारियों, एक पूर्व सरपंच को मौत का जिम्मेदार बताया है। साथ ही लिखा कि, मैं अपने माता-पिता का सम्मान नहीं बचा पाया। मेरे पास अब कोई चारा नहीं है।

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जानकारी के मुताबिक़, ओमप्रकाश रैगर ने मंगलवार को अपने ही घर में फंदे से लटककर जान दे दी। दिवाली के दिन इलाके के लोगों से उनका विवाद हो गया था। इस दौरान आरोपियों ने उसके विकलांग पिता के साथ मारपीट की थी। पुलिस इस मामले में FIR नहीं लिख रही थी। कोर्ट जाने की बात पर शिकायत दर्ज की तो पूर्व सरपंच बीच में आ गया।

सोशल मीडिया पर वायरल सुसाइड नोट में ये लिखा-

‘मेरा नाम ओमप्रकाश रैगर है। मेरे पिता नारायण रैगर दिवाली के दिन अपने खेत में ग्वार व बाजरे की फसल इकट्ठा कर रहे थे, तभी किशनाराम गुर्जर व उनके दो भतीजे कानाराम और नन्दाराम भेड़-बकरियां चराने वहां पहुंच गए। मेरे पिता ने उनका विरोध किया तो मेरे विकलांग पिता को लाठियों से मारा-पीटा गया।

उन्होंने जैसे-तैसे कर अपनी जान बचाई और गांव की तरफ आकर मुझे और मेरी मम्मी को सारी बात बताई। जब हम वहां पहुंचे तो उन्होंने हमें भी घेर लिया और जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। ये हमारे साथ ऐसा ही करते हैं। जब हम खेत में लास्ट में अपनी फसल तैयार करते हैं, उससे पहले ये भेड़-बकरियां खेत में डाल देते हैं और हमें परेशान करते हैं।

जब हम वारदात होने के बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने गए तब थानाधिकारी के पास फोन आ गया कि इनका केस मत लेना और वहां से हमें मेडिकल करवाने के बाद डरा-धमकाकर रवाना कर दिया गया। बोले-कल आना। कल गए तो बोला-फिर कल आना। हमने कोर्ट में जाने का नाम लिया तो उन्होंने हमारी एफआईआर ली और केस को हल्का कर दिया।

इसमें हमारे गांव का पूर्व सरपंच रणजीत सिंह राठौड़ वोट बैंक पाने के लिए शामिल हो गया। उसकी जान-पहचान बहुत बड़ी है। इसलिए उसने और थानाधिकारी अयूब खान ने मिलकर मेरे साथ मेरा छोटा भाई राहुल और मेरे अंकल जुगलकिशोर पर झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी। डिप्टी लोकेन्दर दादरवाल बयान करने गांव आया तो वो भी रणजीतसिंह राठौड़ के घर जाकर बैठ गया और ये सब मिल गए और आज तक कोई भी कार्रवाई नहीं की।

मैं अपने मां-बाप का आत्मसम्मान नहीं बचा पाया। उनके सामने जाने में भी शर्मिंदगी महसूस होती है जिन्होंने मुझे इतना पढ़ाया। आज मैं उनकी रक्षा व आत्मसम्मान नहीं बचा पाया। अब में जिस संविधान को पढ़ा और समझा फिर भी में कुछ नहीं कर पाया इस सिस्टम की वजह से। पूर्व सरपंच के पास पॉलिटिकल बल है और इसी बल के सहारे इन्होंने मेरे केस को पॉलिटिकल बना दिया और मैं सिर्फ देखता रह गया। मैंने कानून की सहायता ली, जबकि इन्होंने हम पर ही झूठा केस बना दिया।

जो मैं अब कर रहा हूं मुझे पता है यह बहुत गलत है। अब मेरे पास इसके सिवा कोई ऑप्शन नहीं है। मेरी मां, मैं तेरा इस जन्म में हो नहीं सका। मुझे माफ करना और मेरी सिस्टर नीतू में तेरे लिए कुछ नहीं कर पाया, मुझे इस बात का बहुत बड़ा अफसोस है। नीतू मम्मी-पापा का ध्यान रखना और हिम्मत मत हारना। तुम लोग समझौता मत करना, इस साजिश में जो शामिल है उन पर कार्रवाई करवाना, चाहे सब कुछ बिक जाए, छोड़ना मत इन सबको।’

 

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